TPA क्या होता है?-What is a TPA in Health Insurance?

आमतौर पर इंश्योरेंस(Insurance) या बिमा(Bima) विभिन्न प्रकार के होते हैं उनमें से हेल्थ इंश्योरेंस(Health Insurance) सबसे अलग है।

नॉर्मल इंश्योरेंस में जब पॉलिसी होल्डर के साथ कोई दुर्घटना होती है तब उन्हें प्रत्यक्ष रूप से नुकसान होता है। नुकसान की तीव्रता दुर्घटना की तीव्रता पर निर्भर करती है। दुर्घटना होने और उससे होने वाले नुकसान का वैल्यूएशन करने के बाद क्लेम अमाउंट का भुगतान इंश्योरेंस होल्डर को किया जाता है।

यदि एक्सीडेंट के कारण हॉस्पिटल में एडमिट होना पड़े तो परेशानी बहुत बढ़ जाती है। एक्सीडेंट या बीमारी दोनों ही अवस्था में हॉस्पिटल में एडमिट होने पर रुपए की व्यवस्था करना बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है। रुपए की व्यवस्था तुरंत करनी होती है, यदि देर हो गई तो मरीज की मौत भी हो सकती है। इस प्रकार का अनुभव लगभग सभी को होता है।

फाइनेंसियल प्लानिंग(Financial Planning) के चलते जमा की गई कैपिटल(Capital) ऐसी विकट अवस्था में कपूर की तरह हवा हो जाती है, फिर रिश्तेदारों, दोस्तों के आगे हाथ फैलाना पड़ता है या कर्जा लेना पड़ता है। कभी-कभी तो जमीन, चल अचल संपत्ति या सारे जेवरात भी बेचने पड़ जाते हैं। जब भी मरीज हॉस्पिटल में एडमिट होता है तो निकट के रिश्तेदारों को चिंता सताने लगती है की पता नहीं अब कितने हजार रुपए और समय लगेगा?

ऐसी स्थिति में हेल्थ इंश्योरेंस(Health Insurance) ही इस गहन समस्या का एक प्रभावी समाधान है और इसे TPA और कैशलेस क्लेम सेटलमेंट ने काफी आसान बना दिया है।

अब सवाल यह उठता है कि हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी क्लेम के आने के बाद ही क्यों अमाउंट अदा करती है? यदि सारे डाक्यूमेंट्स सही है तब इंश्योरेंस कंपनी हॉस्पिटल का सारा खर्च खुद ही हॉस्पिटल को भुगतान क्यों नहीं करती ?

ऐसा करने से इंश्योरेंस होल्डर(Insurance holder) के परिवार जन कितनी सारी चिंताओं से मुक्ति पा लेंगे, शांत मन से मरीज की खुशी-खुशी सेवा करेंगे, मरीज तथा उनके रिश्तेदारों के मन पर कोई दबाव नहीं रहेगा और मरीज जल्दी ठीक हो सकेगा। पॉलिसी होल्डर को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने के बाद सारे डॉक्यूमेंट को इकट्ठा करना और उन्हें सही समय पर क्लेम के लिए कंपनी में जमा कराने और क्लेम के पास होने का इंतजार करने से भी राहत मिलेगी।

इन्हीं विचारों के चलते कैशलैस मेडिक्लेम सेटलमेंट की थ्योरी डेवलप हुई। हेल्थ इंश्योरेंस की इस थ्योरी को चलाने के लिए मुख्य रूप से 4 इकाइयां की जरूरी होती है। ये है :-

  1. पॉलिसी होल्डर (Policy Holder)
  2. हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी (Health Insurance Company)
  3. हॉस्पिटल (Hospital)
  4. थर्ड पार्टी मेडिकल एक्सपर्ट्स यानी थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (Third Party Administrator-TPA)

थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर को टीपीए(TPA) के नाम से जाना जाता है।

आइए इस ​आर्टिकल के माध्यम से जानते हैं की टीपीए क्या होता है? -TPA kya hota hai – What is a TPA in Hindi?

टीपीए क्या होता है? -TPA kya hota hai – What is a TPA in Health Insurance in Hindi?

टीपीए(TPA) एक संस्था होती है, जो मेडिकल क्लेम को प्रोसेसस करती है। TPA इंश्योरेंस कंपनी और उसके कस्टमर्स के बीच एक ब्रिज की तरह होता है, जो दोनों की जरूरतों को पूरा करता है।

आज देश में कई हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां अपने अलग-अलग तरह की पॉलिसी के साथ मौजूद हैं। कंपनियां और प्लान के बढ़ेने के साथ साथ इंश्योरेंस के प्रति जागरुकता बढ़ी है और वैसे ही कस्टमर्स की संख्या भी बढ़ी है। ऐसे में कस्टमर्स को कम से कम समय में बेहतर सेवा को मद्देनजर रखते हुए आईआरडीएआई(IRDAI) ने टीपीए(TPA) या थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर(Third Party Administrator) को लाइसेंस देना शुरू किया है ।

जिस तरह से आईआरडीएआई(IRDAI) एजेंटेस(Agents) और इंश्योरेंस कंपनी(Insurance Company) को लाइसेंस देता है, उसी तरह से टीपीए(TPA) को भी लाइसेंस देता है।

टीपीए क्यों जरूरी है? – TPA kyu jaruri hai – Relevance of TPA

टीपीए(TPA) का अपना अलग अस्तित्व होता है जिसमें मेडिकल एक्सपर्ट(Medical Experts), आईटी एक्सपर्ट(IT Experts), कस्टमर सर्विस एक्सपर्ट(Customer Service Experts) और कम्युनिकेशन एक्सपर्ट्स(Communication Experts) मिलकर काम करते हैं। टीपीए ही पॉलिसी होल्डर(Policy Holder), हॉस्पिटल(Hospital) और हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी(Health Insurance Company) के बीच तालमेल रखने वाली कढ़ी होती है।

प्रत्येक हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी का अपना एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम भी होता है।

हॉस्पिटल में हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी होल्डर मरीजों के साथ-साथ दूसरे मरीज भी होते हैं। ऐसे समय में इंश्योरेंस कंपनी और हॉस्पिटल के एडमिनिस्ट्रेशन सिस्टम(Administration System) के बीच कम्युनिकेशंस रहना बहुत ही मुश्किल काम है। इसका असर हेल्थ इंश्योरेंस के सर्विस पर पड़ता है। यदि कोई मिस्टेक हो गई तो पॉलिसी होल्डर, हॉस्पिटल और इंश्योरेंस कंपनी पर अपना गुस्सा उतारता है और यदि समस्या ने गंभीर रूप धारण कर लिया तो दोनों को कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।

इस कठिनाई से बचने के लिए डेवलप्ड कंट्रीज(Developed Countries) में पिछले कई सालों से टीपीए(TPA) का मॉडल सफलतापूर्वक काम कर रहा है।

इंश्योरेंस सेक्टर के खुल जाने के बाद में आईआरडीएआई(IRDAI) ने भारत में भी उसी मॉडल को अपनाने का निर्णय लिया है। इस समय भारत में 29 से अधिक कंपनियां TPA के रूप में काम कर रही है।

एक TPA कंपनी एक से अधिक हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए काम कर सकती है। प्रत्येक TPA कंपनी को उनके नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर, मेडिकल एक्सपर्ट तथा हुमन रिसोर्स की कैपेसिटी को देखते हुए ही इंश्योरेंस कंपनियां मान्यता देती है। इनका नेटवर्क पूरे देश में फैला होने के कारण ही हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां कार्य करती है।

हेल्थ इंश्योरेंस में टीपीए की भूमिका क्या है? – What is the Role of TPA in Health Insurance in Hindi?

TPA

किसी भी हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम को प्रोसेस करने में TPA की बड़ी अहम भूमिका होती है। TPA के प्रमुख कार्य निम्न प्रकार से हैं –

सारे देश में हॉस्पिटल्स का नेटवर्क बनाना :-

पॉलिसीहोल्डर्स(Policy Holders) को अच्छी सर्विसेज देने के लिए और बेहतरीन मेडिसिन(Medicine) तथा हॉस्पिटलाइजेशन(Hospitalization) के लिए पूरे देश में हॉस्पिटल्स का नेटवर्क बनाना टीपीए का सबसे प्रमुख कार्य है।

पॉलिसीहोल्डर्स को आईडेंटिटी कार्ड इशू करना :-

हेल्थ इंश्योरेंस लेने के लिए एक प्रपोजल फॉर्म भरना होता है उसके साथ एक फोटो, मेडिकल रिपोर्ट और सभी आवश्यक डॉक्यूमेंटस लगाकर कंपनी में जमा कराने होते हैं। जब इच्छुक व्यक्ति इंश्योरेंस पॉलिसी की प्रीमियम कंपनी में जमा करा देता है तब इन सभी डॉक्यूमेंट कि एक कॉफी इंश्योरेंस कंपनी TPA के पास जमा कराती है।

इन डॉक्यूमेंटस के आधार पर TPA प्रत्येक व्यक्ति के लिए आईडेंटिटी कार्ड तैयार करता है और पॉलिसी होल्डर के पते पर भेज देता है।

पॉलिसी होल्डर का ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार करना या सॉफ्ट डेटाबेस बनाना :-

हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के अनुसार प्रत्येक पॉलिसी होल्डर के प्रपोजल फॉर्म में दी गई जानकारी के आधार पर एक डाटाबेस तैयार किया जाता है। यह TPA के सर्वर पर 24 घंटे उपलब्ध रहता है। पूरे साल में किसी भी दिन यदि कोई क्लेम इंटीमेशन या कैशलेस हॉस्पिटलाइजेशन(Cashless Hospitalization) के लिए रिक्वेस्ट आती है तो ऑनलाइन डाटाबेस को देखकर हॉस्पिटल में एडमिट करने या ना करने का निर्णय लिया जाता है।

सॉफ्ट डेटाबेस के तीन प्रमुख हिस्सें या पार्ट्स है-

  • पहले पार्ट में पॉलिसी होल्डर का नाम, पता, जन्मदिन,फोन नंबर, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी आदि व्यक्तिगत जानकारी रहती है।
  • दूसरे पार्ट में हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी का नाम, पॉलिसी का प्रकार, पॉलिसी शुरू होने की तारीख, अंतिम तारीख, स्टैंडर्ड एक्सकल्युजन्स, टर्म्स एंड कंडीशन, स्पेसिफिक इनफॉरमेशंस, कंपनी के ऑफिस का नाम, ऑफिसर का नाम, एजेंट का नाम, कोड नंबर और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की अन्य जानकारी रहती है।
  • तीसरे पार्ट में पॉलिसी होल्डर की हेल्थ स्टेटस, मेडिकल रिपोर्ट, क्लेम हिस्ट्री आदि की जानकारी रहती है।

हॉस्पिटल में एडमिट होने की परमिशन देना या मना करना :-

जब भी किसी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी होल्डर के हॉस्पिटल में एडमिट होने की नौबत आती है तो सबसे पहले TPA से कॉन्ट्रैक्ट कर उस शहर में पैनल या नेटवर्क हॉस्पिटल की इंफॉर्मेशन मांगी जाती है। पैनल हॉस्पिटल में जाकर हॉस्पिटल के इंश्योरेंस कोऑर्डिनेटर(Insurance Co-ordinator) या TPA कोऑर्डिनेटर(TPA Co-ordinato)r को अपना इंश्योरेंस आईडी कार्ड(insurance ID Card) दिखाना होता है, जिसे वह स्कैन कर TPA के पास ईमेल से भेज देता है।

इस ऑथराइजेशन रिक्वेस्ट(Authorization Request) में मरीज की बीमारी का डिटेल होता है। सारी डिटेल को पॉलिसी होल्डर के डेटाबेस से मिलान करने के बाद ही मरीज के हॉस्पिटल में एडमिट होने के निर्णय पर विचार होता है। सामान्यतया 24 घंटों के अंतर्गत पॉलिसी होल्डर की ऑथराइज रिक्वेस्ट (Authorize Request) पर निर्णय लेना अनिवार्य है लेकिन इमरजेंसी की स्थिति में बहुत जल्दी निर्णय लेना होता है।

हॉस्पिटल बिल का पेमेंट :-

TPA द्वारा रिक्वेस्ट अप्रूव होने के बाद पॉलिसी होल्डर मरीज से बिना कोई पैसे लिए हॉस्पिटल में उपचार किया जाता है। मरीज के डिस्चार्ज होते ही सारे बिल को हॉस्पिटल द्वारा TPA को भेजा जाता है। उन बिलों की जांच करना और समय पर हॉस्पिटल को पेमेंट करना TPA की प्रमुख जिम्मेदारी है। कैशलैस मेडिक्लेम(Cashless Mediclaim) सुविधा को सुचारू रूप से चलाए रखने के लिए हॉस्पिटल को समय से पेमेंट करना काफी आवश्यक है।

पॉलिसी होल्डर को सारी फैसिलिटी सरलता से उपलब्ध कराना :-

हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी होल्डर को दिए गए आईडेंटिटी कार्ड में TPA का कांटेक्ट नंबर, टोल फ्री नंबर, ईमेल एड्रेस रहता है। इन नंबरों पर पॉलिसी होल्डर TPA को समय-समय पर कांटेक्ट कर सकता है, पैनल या नेटवर्क हॉस्पिटल की जानकारी और नई अपडेट ले सकता है।

क्लेम अपडेशन और हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी से लाइजनिंग :-

पॉलिसी होल्डर की सारी इनफार्मेशन इंश्योरेंस कंपनी TPA को देती है और उसी आधार पर TPA पॉलिसी होल्डर को आईडेंटिटी कार्ड देता है।

इसी के साथ हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में एक वर्ष के दौरान कोई क्लेम आया है या नहीं आया है?, क्लेम आया तो हॉस्पिटल में एडमिट होना पड़ा था ?, एडमिट होने पर क्लेम की रकम कितनी थी?, क्लेम की रकम को सम एश्योर्ड से घटाने के बाद कितनी राशि बचती है? आदि की सारी जानकारी एक विशेष फॉर्मेट के अंदर समय-समय पर TPA द्वारा इंश्योरेंस कंपनी को देना होता है।

TPA के द्वारा प्राप्त क्लेम अपडेशंस के अनुसार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी पॉलिसी को रीन्यू करते समय नो क्लेम बोनस(No Claim Bonus) देती है अथवा प्रीमियम पर लोडिंग(Loading) लगाती है।

टीपीए किस तरह से पॉलिसीधारकों की मदद करता है? – How TPA helps Policyholders in Health Insurance in Hindi?

TPA

TPA हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी(Health Insurance), हॉस्पिटल(Hospital) और बीमाधारक या पॉलिसी होल्डर(Policy Holder) के बीच एक मेडिएटर(Mediator) की भूमिका निभाता है। इसकी मुख्य जिम्मेदारी क्लेम प्रोसेस(Claim Process) को सरल बनाना है।

क्लेम दो तरह के होते हैं –

  • कैशलेस(Cashless) और
  • रिइंबर्समेंट (Reimburment)

यदि पॉलिसी होल्डर 24 घंटे से अधिक समय तक अस्पताल या हॉस्पिटल में एडमिट रहता है तब वह हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम(Health Insurance Claim) कर सकता है। हालांकि डे-केयर ट्रीटमेंट(Day-Care Treatment) में यह नियम लागू नहीं होता।

हॉस्पिटल में एडमिट होने के मामले में पॉलिसी होल्डर(Policy Holder) को TPA या इंश्योरेंस कंपनी(Insurance Company) को सूचित करने की आवश्यकता होती है। जैसे ही TPA को यह जानकारी मिलती है, यदि संभव हो तो वह हॉस्पिटल को कैशलेस सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कहता है। यदि कैशलेस(Cashless) क्लेम प्रोसेस(Claim Process) नहीं हो सकता तो बाद में बिल को रिइंबर्समेंट(Reimburment) किया जा सकता है।

TPA सभी बिलों और डाक्यूमेंट्स की करीब से जांच करता है और इसके बाद क्लेम सेटलमेंट(Claim Settlement) की मंजूरी दे देता है। यदि कैशलेस(Cashless) इलाज हो रहा है तो बिल का पेमेंट सीधे हॉस्पिटल को होता है। जबकि रिइंबर्समेंट के मामले में यह पॉलिसी होल्डर के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

कैशलेस मेडिक्लेम कैसे कार्य करता है?-How does Cashless Mediclaim work in Health Insurance

  • प्लांड हॉस्पिटलाइजेशन – Planned Hospitalization
  • इमरजेंसी हॉस्पिटलाइजेशन – Emergency Hospitalization

प्लांड हॉस्पिटलाइजेशन – Planned Hospitalization :-

ऐसी बीमारी जो गंभीर ना हो उसके लिए पॉलिसी-होल्डर मरीज को हॉस्पिटल में भर्ती होने से पहले अपनी सारी डिटेल TPA को दे देता है अथार्त इसके अंतर्गत मरीज पहले से ही बीमारी के इलाज के लिए TPA से रिक्वेस्ट कर देता है। TPA से अप्रूव्ड होने के बाद मरीज के किसी भी नेटवर्क हॉस्पिटल में एडमिट होने पर उसका इलाज शुरू हो जाता है।

जिस दिन पॉलिसी होल्डर मरीज को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया जाता है उस दिन वह सारे डाक्यूमेंट्स पर अपने सिग्नेचर करके के घर लौट जाता है। डाक्यूमेंट्स के आधार पर टीपीए हॉस्पिटल को पेमेंट कर देता है। इस कार्य को प्लांड हॉस्पिटलाइजेशन(Planned Hospitalization) कहा जाता है। पथरी,अपेंडिक्स जैसी बीमारियों के लिए यह तरीका अपनाया जाता है।

इंश्योरेंस होल्डर(Insurance Holder), हॉस्पिटल(Hospital) तथा TPA के लिए प्लांड हॉस्पिटलाइजेशन(Planned Hospitalization) सुविधाजनक होता है।

इमरजेंसी हॉस्पिटलाइजेशन – Emergency Hospitalization :-

इमरजेंसी सिचुएशंस में मरीज को हॉस्पिटल में एडमिट करवाना वाकई में काफी इमोशनल काम होता है। इमरजेंसी कभी भी आ सकती है और मौत से लड़ रहे मरीज को तुरंत हॉस्पिटल में भर्ती करवाना और तुरंत इलाज होना जरूरी होता है । ऐसी स्थिति में TPA से अप्रूवल के लिए 24 घंटे काफी लंबा समय होता है। इस परिस्थिति में सुप्रीम कोर्ट ने इमरजेंसी में मरीज को तुरंत एडमिट करें तथा इलाज कराने के आदेश भी दिए हुए हैं।

लेकिन सवाल पैसों से संबंधित होने के कारण हॉस्पिटल चाहता है की TPA की ओर से जल्दी से जल्दी ऑथराइजेशन (Authorization) मिले। कई बार हॉस्पिटल मरीज के परिवार जनों से एडवांस(Advance) रखवा देता है और TPA की ओर से अप्रूवल आते ही वह अमाउंट वापस कर दिया जाता है।

टीपीए के टोल फ्री नंबर और वेबसाइट-Toll Free Number and Website of TPA in Health Insurance

इन दिनों ग्राहक सेवा या कस्टमर सर्विस शब्द का बड़ा ही महत्त्व है। टोल फ्री(Toll Free Number) एक कॉल सेंटर होता है, जिस पर कस्टमर द्वारा कॉन्ट्रैक्ट करने पर उसे विविध प्रकार की जानकारी प्रदान की जाती है। इस कॉन्ट्रैक्ट के एवज में कस्टमर को कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ता है।

टोल फ्री नंबर (Toll Free Number) पर जानकारी के साथ ही निम्न सर्विसेज भी दी जाती हैं :-

  • कंपनी की जानकारी और उसके उत्पाद या प्रोडक्टस की जानकारी,
  • इंश्योरेंस एजेंट या ऑफिसर से अपॉइंटमेंट तय करना,
  • कस्टमर की पॉलिसी से रिलेटेड इंफॉर्मेशन जैसे सरेंडर वैल्यू ,अगली प्रीमियम की ड्यू डेट, अकाउंट स्टेटमेंट आदि।
  • एड्रेस से संबंधित जानकारी या एड्रेस बदलना,
  • नॉमिनेशन करना है या नॉमिनेशन बदलना,
  • कंपनी के ब्रांच का पता और टेलीफोन नंबर,
  • रिनुअल प्रीमियम पेमेंट ऑप्शंस की जानकारी,
  • हॉस्पिटलाइजेशन के रिलेटेड इनफॉरमेशन जैसे कि रजिस्टर्ड हॉस्पिटल का नाम, एड्रेस, फोन नंबर आदि।
  • क्लेम इंटीमेशन करना, क्लेम रजिस्टर्ड करना और रजिस्ट्रेशन नंबर देना, क्लेम के डेवलपमेंट की इनफॉरमेशन देना।
  • कंप्लेन रिसीव करना।

कुछ कंपनियों के टोल फ्री नंबर 24 घंटे और 12 महीने निरंतर कस्टमर सर्विस में रहते हैं।

भारत में हेल्थ इंश्योरेंस में कितने टीपीए है?-How many TPA in Health Insurance in India

भारत में हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी बेचने के लिए तीस से अधिक इंश्योरेंस कंपनियां हैं। इनको देश के हर कोने में क्लेम प्रोसेस में मदद के लिए TPA की भी आवश्यकता होती है। पूरे देश में कई TPA हैं जो अपनी सर्विसेज दे रहे हैं। प्रमुख TPA है :-

सारांश

कैशलैस मेडिक्लेम प्रोसेस(Cashless Mediclaim process) हेल्थ इंश्योरेंस(Health Insurance) बिजनेस को मिली संजीवनी की तरह है। TPA द्वारा कैशलेस के कार्य को सफल बनाने में कंप्यूटर तथा इंटरनेट का सहयोग महत्वपूर्ण है। एक भी रुपया खर्च किए बगैर तुरंत हॉस्पिटल में एडमिट होना तथा इलाज शुरू करने की महत्वपूर्ण सुविधा कैशलैस मेडिक्लेम से हम सभी के लिए उपलब्ध है।

इसमें कोई शक नहीं है की हेल्थ इंश्योरेंस के चारों ओर प्रचार प्रसार और प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकार के मेडिकल सुविधाएं मिलने की दृष्टि से TPA द्वारा कैशलेस क्लेम प्रोसेस सर्वश्रेष्ठ सुविधा होगी। इसकी कार्य प्रणाली को सभी लोगों द्वारा अच्छी तरह से जानना, समझना जरूरी है ताकि बिना देर किए समय पर इस सुविधा का लाभ उठाया जा सके।

उम्मीद है कि आपको यह आर्टिकल टीपीए क्या होता है? -TPA kya hota hai – What is a TPA in Health Insurance? पसंद आया होगा। इसके अलावा अगर आपके पास अभी भी इससे संबंधित कोई भी डाउट है या कोई बेहतरीन सुझाव हैं, तो इसके लिए आप नीचे कमेंट लिख सकते हैं।

2 thoughts on “TPA क्या होता है?-What is a TPA in Health Insurance?”

    • हाल ही में आईआरडीए(IRDAI) द्वारा एक कस्टमर कंप्लेन सिस्टम Develop किया है इसके अनुसार पॉलिसीहोल्डर सीधे IRDAI के पास कंप्लेन कर सकते हैं।

      IRDAI के पास सिर्फ पॉलिसीहोल्डर ही शिकायत रजिस्टर करवा सकता है।

      IRDAI के शिकायत निवारण कक्ष का टोल फ्री नंबर है :- 155255

      IRDAI का एड्रेस :-

      ग्राहक शिकायत निवारण केंद्
      इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी
      यूनाइटेड इंडिया टावर, 9th फ्लोर
      3.5.817/818 बशीर बाग
      हैदराबाद, आंध्र प्रदेश
      500029
      Email : [email protected]
      वेबसाइट : http://www.irda.gov.in

      यदि इंश्योरेंस कंपनी के शिकायत निवारण ऑफिसर का पॉलिसीहोल्डर के नाम 15 दिनों के अंदर कोई जवाब नहीं आता है तब IRDAI की वेबसाइट पर “इंटीग्रेटेड ग्रीवेंसेस मैनेजमेंट सिस्टम” के द्वारा ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है।

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