स्विंग ट्रेडिंग क्या है? – What is Swing Trading?

ज्यादातर ट्रेडर(Traders) कम टाइम पीरियड का ट्रेडिंग(Trading) करके पैसा कमाने में रुचि रखते हैं परंतु वह ऐसी कोई भी स्टेटर्जी का उपयोग नहीं करते हैं, जिससे उन्हें हमेशा अच्छे रिजल्ट मिले ।

ऐसे ट्रेडर्स के लिए बहुत ही कम रिस्क(Risk) के साथ अच्छा पैसा कमाने के लिए स्विंग ट्रेडिंग(Swing Trading) एक बेहतरीन स्टेटर्जी है।

जब आप कम टाइम पीरियड के लिए ट्रेडिंग करते हैं तब आपका लक्ष्य सही समय पर ट्रेड(Trade) में एंट्री करना और निश्चित टाइम पीरियड के लिए पोजीशन को होल्ड करना और सही समय पर प्रॉफिट निकाल लेने का होना चाहिए।

स्विंग ट्रेडिंग(Swing Trading) का तरीका आपको ऐसे बहुत ही आसान तरीके से ट्रेडिंग करने का मौका देता है।

यह आर्टिकल आपको स्विंग ट्रेडिंग(Swing Trading) में कब एंट्री करना चाहिए ?, कितने समय तक पॉलिशन होल्ड करनी चाहिए ? और कब सेल करके बाहर निकलना चाहिए ? इस तरह के महत्वपूर्ण सवालों का जवाब हासिल करने में मदद करेगा।

स्विंग ट्रेडिंग क्या है? – What is Swing Trading ?

swing-trading

स्विंग ट्रेडिंग का मुख्य उद्देश्य विभिन्न शेयर्स(Shares) या इंडेक्स में कम टाइम पीरियड में दिखने वाले उतार-चढ़ाव से प्रॉफिट(Profit) कमाना होता है। इसमें हर एक शेयर्स के फंडामेंटल(Fundamentals) की चिंता नहीं होती है।

किसी भी कंपनी के शेयर्स या इंडेक्स में पोजीशन खड़ी करने के लिए जो सबसे महत्वपूर्ण बात का ध्यान रखना जरूरी है वह है उनकी लिक्विडिटी(Liquidity)

स्विंग ट्रेडर्स(Swing Traders) किसी भी प्रकार के बाजार में मुनाफा या प्रॉफिट कमा सकते हैं पर उन्हें अधिकतम प्रॉफिट तभी मिलता है, जब बाजार किसी ट्रैंड(Trend) में स्विंग के साथ आगे बढ़ता है या फिर ऐसे रेंज(Range) में होता है, जिसमें ट्रेडिंग(Trading) करने जैसे हालात मौजूद होते हैं।

लहरें या तरंगे प्रकृति में मौजूद होती हैं। जब तालाब में एक पत्थर फेंकते हैं, तब तालाब में तरंग उठती नजर आती है और यही तरंग लहरों के रूप में आगे बढ़ती है। इसी प्रकार से कई शेयर्स(shares) भी शेयर मार्किट(Share Market) की लहरों के अनुसार स्विंग(Swing) के साथ आगे बढ़ते हुए नजर आते हैं।

स्विंग ट्रेडर्स(Swing Traders) ऐसे स्विंग(Swing) का उपयोग करके कम पीरियड में शेयर्स की खरीद और बिक्री करके प्रॉफिट कमा सकते हैं।

जब बाजार ट्रैंड में होता है, तब तेजी की स्थिति में स्विंग के सपोर्ट(Support) के नजदीक खरीदारी(Buy) करनी चाहिए और ट्रेंड रिवर्सल की सिचुएशन में या टाइम पूरा होने पर, जो भी स्थिति पहले आती है उसके अनुसार बिक्री(sale) करके बाहर निकलना चाहिए।

जब बाजार रेंज(Range) में होता है, उस समय नीचे की दिशा में सपोर्ट और ऊपर की दिशा में रजिस्टेंस दिखाई देता हैं। इसी कारण से स्विंग ट्रेडर्स को अपनी लागत या कॉस्ट(Cost) पर बहुत ही कम रिस्क के साथ सपोर्ट के पास खरीदी करने और रजिस्टेंस के पास बिक्री करने के कई मौके मिलते हैं।

स्विंग ट्रेडिंग के उद्देश्यObjectives of Swing trading

स्विंग ट्रेडिंग(Swing Trading) का मुख्य उद्देश्य ट्रेंड रिवर्सल(Trend reversal) और कंटिन्यूएशन(Continuation) से मार्केट में आने वाले पॉजिटिव ब्रेकआउट(Positive breakout) को ढूंढना और सही समय पर एंट्री करके दिखने वाले उतार-चढ़ाव का फायदा उठाना होता है।

ट्रेडर(Traders) को अपनी लागत या कॉस्ट(Cost) पर अच्छा प्रॉफिट कमाने के लिए खुद के टारगेट पर फोकस करना चाहिए।

स्विंग ट्रेडर्स(Swing Traders) का उद्देश्य होना चाहिए कि वह बड़े उतार-चढ़ाव में मिलने वाले मौके पर तुरंत मुनाफा निकाल सके और मोमेंटम के गायब होने पर बाहर निकल सके।

जब भी किसी लंबे समय से स्थापित ट्रेंड का अंत होने की संभावना होती है, तब एक ऐसा समय आता है जब बाजार तीव्र तेजी या तीव्र मंदी दर्शाता है और उस समय मोमेंटम ट्रेडर्स(Momentum traders) इसका फायदा उठाते हैं।

इस तरह के मोमेंटम के दौरान तेजी होने पर प्राइस तुरंत बढ़ता है और मंदी होने पर प्राइस तुरंत घटता है।

स्विंग ट्रेडर्स(Swing Traders) ऐसे लंबे सयम से स्थापित ट्रेंड में कम पीरियड में उठने वाले स्विंग(Swing) का फायदा लेते हुए नजर आते है।

जब कोई शेयर या इंडेक्स एक रेंज में होता है और सपोर्ट स्थापित होता है, तब उस लेवल पर खरीदने का प्रयास करना चाहिए और उसके बाद दिखने वाली तेजी का अधिकतम फायदा उठाने का प्रयास करना चाहिए।

इसी प्रकार जब मार्केट रजिस्टेंस पर होता है तब रजिस्टेंस के नजदीक बिक्री करके खड़े रहना चाहिए और मार्केट के गिरने पर उसका फायदा उठाना चाहिए।

स्विंग ट्रेडिंग(Swing Trading) में लाभ या प्रॉफिट कमाने का आधार किस प्रकार के शेयर्स में ट्रेडिंग किया है ? पर निर्भर करता है।

साधारण रूप से कहा जा सकता है कि किसी भी ट्रेडिंग में 5% से 15% की कमाई कर सकते हैं।

स्विंग ट्रेडिंग के पोर्टफोलियो(Portfolio) का टर्नओवर डे ट्रेडर(Day Traders) की तुलना में बहुत ही कम होता है परंतु पोजीशन डे ट्रेडर्स की तुलना में अधिक होता है।

ज्यादातर स्विंग ट्रेडर्स सप्ताह में 3 से 5 बार ट्रेडिंग करते हुए दिखाई देते हैं।

शेयर होल्डिंग अवधिShare Holding Period

शेयर्स को पकड़कर रखने की अवधि(Holding Period) का मूल आधार निम्न हैं :-

स्विंग ट्रेडिंग(Swing Trading) में एक बार पोजीशन खड़ी करने के बाद निश्चित दिनों तक पकड़कर रखने के बजाय किसी भी शेयर्स या इंडेक्स को तब तक पकड़ कर रखा जाए चाहिए, जब तक उसमें मोमेंटम रहता है।

स्विंग ट्रेडिंग(Swing Trading) की पोजीशन से तब बाहर निकलना चाहिए जब पहली बार ट्रेंड रिवर्सल (Trend reversal) का संकेत मिलता है और ट्रेलिंग स्टॉप लॉस(Trailing Stop Loss) का लेवल टूटता है।

किसी भी शेयर्स के कंसोलिडेशंस में जाने से पहले उसमें से बाहर निकल जाना चाहिए।

यह ट्रेडिंग केवल एक टाइम फ्रेम पर फोकस करके नहीं करनी चाहिए।

क्या स्विंग ट्रेडिंग कारगर है?- Is Swing Trading effective?

swing-trading

जब लोगों को कोई नया काम करना होता है तब वे लोग काफी दुविधा में नजर आते हैं। ऐसा स्विंग ट्रेडिंग(Swing Trading) के विषय में भी हो सकता है।

स्विंग ट्रेडिंग(Swing Trading) कारगर है या नहीं इसका पता इस बात से चलेगा की आप कितनी अच्छी तरह से इसका उपयोग करते हैं।

यह ट्रेडिंग का कोई नया तरीका नहीं है। स्विंग ट्रेडिंग लंबे समय से टॉय और टेस्ट किया हुआ तरीका है। यदि इसका सटीकता से अमल किया जाए तो बहुत अच्छी कमाई की जा सकती हैं।

इसलिए बोल सकते हैं की स्विंग ट्रेडिंग(Swing Trading) निश्चित रूप से कारगर है।

इसमें ज्यादातर ट्रेड(Trade) ट्रेंड(Trend) की दिशा में ही किया जाता है। पोजीशन तभी ली जाती है जब ट्रेंड(Trend) पर पूरी तरह से यकीन होता है।

स्विंग ट्रेडिंग में ध्यान रखने योग्य बातें- Things to keep in mind in Swing Trading

सबसे पहले यह तय करना जरूरी है कि आप स्विंग ट्रेडिंग के लिए कितना समय दे सकते हैं।

क्योंकि स्विंग ट्रेडिंग का उपयोग करने वाले अधिकतर लोग पूरा दिन किसी न किसी काम या नौकरी या फिर बिजनेस में व्यस्त रहते हैं।

इंट्राडे ट्रेडिंग(Intraday Trading) की तरह स्विंग ट्रेडिंग में पूरा दिन ट्रेडिंग टर्मिनल(Trading Terminal) के सामने बैठने की जरुरत नहीं होती है।

स्विंग ट्रेडिंग को आप अपनी वर्तमान नौकरी या कारोबार या बिजनेस के साथ कर सकते हैं। आपको अपनी नौकरी छोड़ने की जरूरत नहीं और ऐसा करना भी नहीं हैं।

इसके बदले ऐसे तरीके का उपयोग करना चाहिए जिसमें सप्ताह के कुछ घंटे रिसर्च करके ऐसे सफल ट्रेडिंग सेट-अप (Set-up) का विकास करे जो सही समय पर बाजार में एंट्री(Entry) लेने का मौका देगा और ट्रेलिंग स्टॉप लॉस (Trailing Stop Loss) की मदद से बहुत ही ज्यादा प्रॉफिट दिलाएगा और मुश्किल समय में अगर किसी ट्रेडिंग में पहले से डिसाइड की गई ट्रेंड नहीं दिखाई दे तो स्टॉपलॉस(Stop Loss) की मदद से कम से कम नुकसान के साथ ट्रेडिंग में से बाहर निकाल देगा।

स्विंग ट्रेडिंग में टेक्निकल एनालिसिस का महत्व – Importance of Technical Analysis in Swing Trading

अगर आपको टेक्निकल एनालिसिस(Technical Analysis) का नॉलेज है तो आप किसी भी प्रकार की टाइम पीरियड के ट्रेडिंग में सफल हो सकते हैं और यही सब स्विंग ट्रेडिंग में भी लागू होता है।

अगर आपको स्विंग ट्रेडिंग में अधिकतम प्रॉफिट लेना हो तो टेक्निकल एनालिसिस का गहन नॉलेज होना जरूरी है।

स्विंग ट्रेडिंग कैसे काम करती है? –  How does Swing Trading Work?

आमतौर पर एक स्टॉक(Stock) या शेयर अपने सपोर्ट लेवल(Support Level) से बाउंस होकर ऊपर की तरफ अपने रजिस्टेंस लेवल(Resistance Level) तक पहुंचता है और उसके बाद ड्रॉप(Drop) होना शुरू होता है।

अप(Up) और डाउन(Down) के इस मूवमेंट को स्विंग(Swing) कहते हैं।

  1. एक स्विंग ट्रेडर(Swing Trader) आमतौर पर हाई वॉल्यूम(High Volume) और हाई वोलैटिलिटी (High Volatility) शेयर की तलाश करता है। वोलैटिलिटी(Volatility) को आमतौर पर इस बात से मापा जाता है की समय के साथ प्राइस में कितना मूवमेंट होता है।
  2. स्टॉक या शेयर्स को चुनना :- सबसे पहला कदम एक ऐसे शेयर्स या स्टॉक की तलाश करना है जो शॉर्ट टर्म (Short Term) में अच्छा रिटर्न(Return) दे सके।
  3. चार्ट का एनालिसिस करना :- जब एक बार स्विंग ट्रेडिंग के लिए शेयर को चुन लिया जाता है तो विभिन्न इंडिकेटर (Indicators) जैसे कि आर एस आई(RSI) मूविंग एवरेज(Moving Average) कन्वर्जेंस, डायवर्जेंस (Convergence Divergence) वॉल्यूम(Volume) और ट्रेंड लाइन(Trend Lines) की मदद से चार्ट (Chart) का एनालिसिस करते हैं और समझने का प्रयास करते हैं कि यह हिस्टोरिकल(Historical) रूप से कैसा परफॉर्म कर रहा है।
  4. स्टॉक(Stock) या शेयर (Share) भविष्य में कैसा परफॉर्मेंस देगा इसके लिए कंपनी और बिजनेस न्यूज आर्टिकल को भी पढ़ना चाहिए।
  5. एंट्री(Entry) और एग्जिट(Exit) सेट करना :- अपने एंट्री प्राइस(Entry Price) के 5% नीचे स्टॉप लॉस (Stop-Loss) और एंट्री प्राइस (Entry Price) के 20% ऊपर टारगेट प्राइस (Target Price) सेट करना चाहिए ।

स्विंग ट्रेडिंग के एडवांटेज और डिसएडवांटेज – Advantage and Disadvantage of Swing Trading

स्विंग ट्रेडिंग के निम्न एडवांटेज और डिसएडवांटेज है :-

एडवांटेज(Advantage)

  • इसमें डे ट्रेडिंग(Day Trading) के मुकाबले कम समय की आवश्यकता होती है।
  • यह अधिकतम शॉर्ट टर्म प्रॉफिट(Short Term Profit) को कैप्चर करता है।
  • ट्रेडिंग प्रोसेस (Trading Process) को सिंपलीफाई करने के लिए ट्रेडर्स(Traders) टेक्निकल एनालिसिस पर भरोसा कर सकते हैं।

डिसएडवांटेज(Disadvantage)

  • ट्रेड पोजीशंस(Trade Position) ओवरनाइट(Over Night) या वीकली(weekly) या साप्ताहिक मार्केट रिस्क (Market Risk) पर आधारित होती है।
  • अचानक मार्केट में उलटफेर से काफी नुकसान हो सकता है।
  • स्विंग ट्रेडर्स(Swing Traders) मैक्सिमम टाइम शॉर्ट टर्म(Short Term) मार्केट चक्कर में लॉन्ग टर्म(Long Term) मार्केट प्रॉफिटेबिलिटी(Profitability) को मिस कर देते हैं।

डे ट्रेडिंग और स्विंग ट्रेडिंग में अंतर – Difference between Day Trading and Swing Trading

डे ट्रेडिंग और स्विंग ट्रेडिंग में निम्नलिखित अंतर है :-

डे ट्रेडिंग(Day Trading)स्विंग ट्रेडिंग(Swing Trading)
डे ट्रेडिंग में कम मार्जिन की आवश्यकता होती है।डे ट्रेडिंग की तुलना में अधिक मार्जिन की आवश्यकता होती है।
डे ट्रेडर्स को फुल टाइम ट्रेडर्स कहा जाता है।स्विंग ट्रेडर्स को पार्ट टाइम ट्रेडर्स कहा जाता है।
डे ट्रेडर्स मल्टीपल ट्रेड्स कर सकते हैं और बड़े प्रॉफिट का इंतजार नहीं करते हैंस्विंग ट्रेडर्स ट्रेंड्स का एनालिसिस करते हैं और ऐसे शेयर्स को चुनते हैं जो भविष्य में अच्छा प्रॉफिट बनाते हैं।
डे ट्रेडर्स प्रॉफिट अपॉर्चुनिटी लगातार मॉनिटर करते हैं और एक मिस्टेक सारे प्रॉफिट को खत्म कर देती हैं।स्विंग ट्रेडर्स के लिए प्रॉफिट एंड लॉस की सिचुएशन धीरे धीरे बनती है क्योंकि उनका टारगेट अधिक प्रॉफिट कमाना होता है।

सारांश

कई स्विंग ट्रेडर्स(Swing Traders) ट्रेड का मूल्यांकन रिस्क(Risk) और रिवॉर्ड(Reward) के आधार पर करते हैं।

वे चार्ट पर एनालाइज करके डिसाइड करते हैं कि कहां पर एंट्री लेनी है? और कहां पर स्टॉपलॉस रखेंगे? और अनुमान लगाएंगे की कहां से प्रॉफिट के साथ बाहर निकल सकते हैं।

ट्रेड(Trade) के शॉर्ट टर्म नेचर के कारण स्विंग ट्रेडर्स टेक्निकल एनालिसिस(Technical Analysis) का यूज करते हैं और उस एनालिसिस की विश्वसनियता को बढ़ाने के लिए फंडामेंटल एनालिसिस(Fundamental Analysis) का भी उपयोग किया जा सकता है।

स्विंग ट्रेडर्स(Swing Traders) अक्सर डेली चार्ट(Daily Chart) पर अपॉर्चुनिटी(Opportunity) की तलाश करते रहते हैं।

उम्मीद करते है की यह आर्टिकल स्विंग ट्रेडिंग क्या है?(What is Swing Trading ?) और कैसे करते है पसंद आया होगा।

People also ask

ट्रेडिंग कितने प्रकार(Types of Trading) के होते हैं?

ट्रेडिंग मुख्यत 4 प्रकार के होते हैं। जो कि इंट्राडे ट्रेडिंग, स्विंग ट्रेडिंग, शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग, लॉन्ग टर्म ट्रेडिंग हैं।

क्या स्विंग ट्रेडिंग वास्तव में लाभदायक(Swing Trading Really Profitable) है?

स्विंग ट्रेडिंग एक ऐसी ट्रेडिंग स्टेटर्जी है जो शॉर्ट टर्म ट्रेंड में छोटे लाभ लेने और नुकसान में तेजी से कटौती करने पर केंद्रित है।

स्विंग ट्रेडिंग कितने दिनों के लिए किया जाता है?

सबसे लोकप्रिय ट्रेडिंग स्टेटर्जी स्विंग ट्रेडिंग(Swing Trading) में सिम्पल मूविंग एवरेज का उपयोग 10 दिनों या 20 दिनों के वैल्यू डेटा को समझने के लिए किया जाता है।

क्या स्विंग ट्रेडिंग एक अच्छा विचार(swing trading a good idea) है?

समय का सही उपयोग करते हुए स्विंग ट्रेडर्स प्राइस मूवमेंट को पकड़ने के लिए फंडामेंटल और टेक्निकल एनालिसिस का उपयोग करते है।

क्या स्विंग ट्रेडिंग शुरुआती लोगों के लिए अच्छी(Swing Trading Good for Beginners) है?

डे ट्रेडिंग की तुलना में स्विंग ट्रेडिंग करने में कम विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है।

ज्यादातर स्विंग ट्रेडर क्यों असफल(Swing Traders Fail) होते हैं?

कम कैपिटल होने के कारण ज्यादातर ट्रेडर विफल हो जाते हैं।

Leave a Comment